

मंदिर प्रांगण से लेकर पूरे कस्बे तक भक्ति का अनुपम दृश्य देखने को मिला। हनुमान चालीसा के सामूहिक पाठ, भावविभोर कर देने वाली महाआरती और हरिनाम संकीर्तन ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। इसके पश्चात निकली भव्य शोभायात्रा में “हरे राम हरे रामा, राम राम हरे हरे, हरे कृष्णा हरे कृष्णा, कृष्णा कृष्णा हरे हरे” के मधुर कीर्तन से वातावरण गुंजायमान हो उठा।
शोभायात्रा के मुख्य बाजार पहुंचते ही श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा। व्यापार मंडल, दुकानदारों एवं नागरिकों ने पुष्प वर्षा कर, रंगोलियां सजाकर भक्तों का आत्मीय स्वागत किया। महिलाएं, पुरुष, बुजुर्ग और बच्चे भक्ति में लीन होकर हरिनाम का गुणगान करते नजर आए। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो पूरा नापासर ही एक विशाल मंदिर में परिवर्तित हो गया हो।
एक माह तक निरंतर चले अखण्ड हरि कीर्तन में पुरुष एवं महिला श्रद्धालुओं ने दो-दो घंटे की पारियों में तन-मन-धन से सहभागिता निभाई। निरंतर हरिनाम स्मरण से कस्बे का वातावरण पूर्णतः सात्विक एवं धर्ममय बना रहा। यह आयोजन श्रद्धा, समर्पण और सामाजिक एकता का जीवंत उदाहरण बनकर नापासर के धार्मिक इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ गया।

