

इसी क्रम में पारीक और झंवर समाज की गवरजा माता भी मुख्य बाजार तक पहुंचीं। सजी-धजी गवरजा के साथ लोग नाचते-गाते हुए उत्सव में शामिल हुए, जिससे पूरे कस्बे में उत्साह और उल्लास का माहौल बना रहा। जानकारी देते हुए किशन सिंह सांखला ने बताया कि नापासर की सबसे पहली हड़बु जी सांखला रावली गवरजा माता को रविवार को पारंपरिक रूप से पानी पिलाने की रस्म अदा की जाएगी। शनिवार को गवर सवारी हड़बु जी सांखला मंदिर से मुख्य बाजार तक धूमधाम से निकली, वहीं सोमानी परिवार में ननिहाल जाने की परंपरा भी निभाई जाएगी। रविवार शाम को रावली गवर सांखला, धांधला गवर, पारीक गवर, मूंधड़ा गवर और झंवर गवर की सवारियां गाजे-बाजे और डीजे के साथ बालिका विद्यालय पहुंचेंगी,जहां पानी पिलाने की पारंपरिक रस्म अदा कर गणगौर महोत्सव का समापन किया जाएगा। कुल मिलाकर, नापासर में गणगौर मेले ने एक बार फिर सांस्कृतिक परंपरा और उत्साह की शानदार झलक पेश की है।

